शब्दभेदी as on KDP
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शब्दभेदी as on KDP

ब्रह्मांड का प्रत्येक जीव एकदूसरे से अपनी इच्छाएँ, आशाएँ और मनोभावों को प्रकट करने के लिए संकेतों या वाणी का प्रयोग करता है| वाणी, शब्दों के रूप में ढल कर ही एक निश्चित आशय प्रकट कर पाती है, इसीलिए भारतीय संस्कृति में शब्द को ब्रह्म कहा गया है| <br>किसी ने क्या खूब कहा है कि <br>“शब्द सम्हारे बोलिए, शब्द के हाथ न पाँव,<br>एक शब्द शीतल करे, एक शब्द दे घाव|| <br>हम भारतीय इस बात पर गर्व करने का हक रखते हैं कि दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों द्वारा उपयोग में लाई जाने वाली समस्त भाषाओं में मात्र हमारी &quot;संस्कृत&quot; और संस्कृतजा अर्थात &quot;हिन्दी&quot; ही ऐसी भाषाएँ हैं जो पूर्णतया वैज्ञानिक भाषाएँ हैं, जिनको जैसा बोला जाता है; वैसा ही लिखा जाता है| यह सौभाग्य दुनिया की किसी और भाषा को प्राप्त नहीं है| साथ ही हमारी ये दोनों भाषाएँ शब्द संख्या के लिहाज से भी दुनिया की समस्त भाषाओं से ज्यादा समृद्ध हैं|<br>&quot; शब्दभेदी &quot; को आप मेरी पहली पुस्तक &quot;भाषाई हुड़दंग&quot; का विस्तारित रूप समझ सकते हैं| &quot; शब्दभेदी &quot; में भी शब्दों के साथ कई तरह के प्रोयोगों को आप पाएंगे जो कहीं आपको हंसाएंगे तो कहीं यह सोचने के लिए मजबूर कर देंगे कि वाह!, एक ही शब्द एक खास तरीके से प्रयोग में लाने पर कैसे भिन्न व अधिक मारक असर पैदा कर सकता है|<br>इस पुस्तक का शीर्षक हमारे गौरवशाली इतिहास चरित्र पूज्य महाराज पृथ्वीराज चौहान जी के उस सामर्थ्य पर आधारित है जिसमें उन्हें शब्द श्रवण मात्र पर उस शब्द के उद्गम स्थल पर सटीक निशाना लगाने की महारत हासिल थी और इसीलिए उनके वाणों को इतिहास शब्दभेदी वाण कह कर पुकारता है| तो जान लीजिए कि इस पुस्तक में शब्दों के शब्दभेदी वाण ही चलाए गए हैं| मैं महसूस करता हूँ कि शायद यही शीर्षक था जो मेरी इस पुस्तक को पूर्णतया व्याख्यायित कर सकता था |<br>इस पुस्तक में मैंने एक और प्रयोग किया है कि कई जगहों पर अंतर्जाल से उपयुक्त चित्र एकत्रित करके प्रस्तुत किए हैं जो इस पुस्तक को और अधिक रोचक और पठनीय बनाते हैं| शेष तो पाठक ही तय करेगे|<br> छत्र पाल वर्मा <br>

5/13/2026
Source: https://fliphtml5.com/bxkwh/szwj

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